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baliraja
बुधवार, 5 नवंबर 2008
gaarawaa
कधी हवा ती कुंद रहाते
जीवन त्याने मग कोंदतते
अशावेळी कुणी मधुररवाने
आनी पहा गारवा[४]
नैराश्याने पुरे ग्रासुनी
कुणी जातसे हताश होवूनी
अशावेळी तो सहानुभूतीचा
शब्द थारे गारवा[५]
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कृष्यणकुमार प्रधान
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